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त्वचा के सामान्य रोग और उनके आयुर्वेदिक उपचार

त्वचा के सामान्य रोग और उनके आयुर्वेदिक उपचार;-शरीर का रक्षा -कवच है त्वचा। त्वचा ही शरीर को सर्दी,गर्मी,धुप और रोगाणुओं से बचती है। शारीरिक स्वस्थता त्वचा के विकार मुक्त होने पैर निर्भर करती है। इसलिए त्वचा रोगो से बचने की बहुत जरुरत है। Common skin diseases and their Ayurvedic treatment

तेल मालिश करना एक महत्वपूर्ण क्रिया है। इस से त्वचा को कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते है। उन में से कुछ इस प्रकार है :-

  • त्वचा के छिद्र खुल जाते है , जिस से शरीर के भीतर के विजातीय तत्व दर्व्य के रूप में बहार निकल जाते है।
  • त्वचा मुलायम और कोमल हो जाती है तथा त्वचा की रोगप्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ जाती है।
  • रक्त -संचार में भी अभिवृद्धि होती है।
  • त्वचा छिद्र बंद होने की हालत में खुजली , दाद और मुहासे हो जाते है। तेल मालिश से त्वचा के छिद्र खुल जाते है, जिस से खुजली,दाद,और मुहासों से भी बचाव होता है।

इस प्रकार देखा जाये तो त्वचा की निरोधक क्षमता के लिए तेल मालिश सब से उपयुक्त उपाय है।

आज हम आपको त्वचा के सामान्य रोग और उनके आयुर्वेदिक उपचार की जानकारी देंगे ,जो की आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होंगे….

त्वचा के सामान्य रोग और उनके आयुर्वेदिक उपचार

खुजली

त्वचा के सामान्य रोग और उनके आयुर्वेदिक उपचार
त्वचा के सामान्य रोग और उनके आयुर्वेदिक उपचार

यह एक सांसर्गिक रोग है। प्रभावित जगह पे बहुत तेज रगड़ने को जी चाहता है। खुजली का कारण गंदगी और आसपास का दूषित वातावरण है। खुजली संक्रमित रोह है। खुजली के रोगी के संपर्क में आने पर ,उसके दूषित कपड़ो के प्रयोग से ,उसके साथ खाने -पिने से ,यंहा तक की उसकी साँसों के संपर्क से भी खुजली हो सकती है। रात में खुजली अधिक बढ़ जाती है और कभी कभी खुजलाते समय त्वचा लाल हो जाती है और छील जाने तक की हालत में बहुत सी नयी समस्याएँ हो जाती है।
खुजली के २ प्रकार होते है ; 1 शुष्क खुजली और दूसरी पानीदार खुजली {त्वचा के सामान्य रोग और उनके आयुर्वेदिक उपचार}

खुजली के आयुर्वेदिक उपचार :

  • त्वचा पर ताज़ा नारियल का तेल और टमाटर का रस मिलाकर मालिश करे। मालिश के एक घंटे बढ़ सादा पानी से नहा ले। आपको गर्म पानी या बहुत ठंडा पानी काम में नहीं लेना है।
  • निम्बू का रस ,चमेली का तेल मिलाकर शरीर पैर मालिश करे।
  • संतरे के छिलको का उबटन बनाकर शरीर पर दिन में दो बार मले। इस से पुराणी और भयंकर खुजली भी मिट जाती है।
  • अरहर की दाल को पीसकर ,उसे दही में मिला ले ,इस मिश्रण को दिन में एक बार जरूर लगाए।
  • काली मिर्च और गंधक घी के साथ खरल करके शरीर पर लगाए और धुप में रहे। तीन घंटे बाद गुनगुने पानी से नहा ले।
  • नीम की पत्तियों के पानी से स्नान करे
  • सरसों के तेल में शुद्ध गंधक पीसकर लगाए
  • सुखी खुजली के लिए छह ग्राम sodabicarb में आधा कागजी निम्बू का रस निचोड़ ले। दो ग्राम सरसों का तेल मिलाकर सारे शरीर पर मल ले। धुप में दो घंटे रहे और फिर नहा ले
  • 250gm सरसों तेल को गर्म कर इसमें aak के 21 पते एक एक कर डालकर जलाये। जब सब पत्ते जलकर राख हो जाये ,तेल को ठंडा होने दे। अब इसमें बारीक़ मैनसिल (थोड़ी मात्रा ) मिलाये। २-३ दिन मालिश करने से खुजली और बाकि त्वचा से सम्बंधित रोग दूर होंगे।
  • खस -खस के बीज २गम ,पानी में पीस ले ,अब इसमें थोड़ा निम्बू का रस मिलाकर शरीर पे मालिश करना सब से अच्छा और कारगर उपाय है।
  • सत्यानाशी के बीज १गम को पानी में पीकर पिने से भी खुजली दूर हो जाती है।
  • साफी ,रक्त शोद्गाक ,रक्त सुरकता ,सारसा आदि आयुर्वेदिक मेडिसीन का सेवन करना भी बहुत लाभकारी होता है।

उपरोक्त सभी उपाय किसी भी खुजली को सही करने रामबाण उपयाय है। त्वचा के सामान्य रोग और उनके आयुर्वेदिक उपचार

दाद

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त्वचा के सामान्य रोग और उनके आयुर्वेदिक उपचार

शरीर पर छोटे छोटे आभायुक्त गोल दाने निकल आते है। इसमें खूब जलन और खुजली होती है। दाद कि जगह शोध युक्त व उभरा हुआ होता है। त्वचा के सामान्य रोग और उनके आयुर्वेदिक उपचार:-

दाद का आयुर्वेदिक उपचार

  • बड़ी हरड़ को सिरके में पीसकर लगाए।
  • ब्लैक चने को पानी में पीसकर शहद के साथ मिलाकर लगाए।
  • 100gm नारियल के तेल में 20gm कपूर मिलाकर लगाए। इस से खुजली और जलन तुरंत ही कम हो जाती है।
  • 10gm कपूर ,10gm गंधक ,125ml मिटटी के तेल में मिलाकर के एक मरहम बना ले ,इसे हर रोज एक सप्ताह तक लगाए।
  • इमली के बीज ,निम्बू के रस में पीसकर उसका पेस्ट दाद वाली जगह लगाए।
  • अंजीर अथवा मदार (ाक)का दूध ,दाद पर लगाने से दाद गायब ही हो जाता है।
  • गेंदे के पत्तों को पीसकर लैप करने से या उनका रस लगाने से ये रोग दूर होता है।
  • दाद की जगह को खुजाकर सुहागा ,निम्बू का रस मिलाकर लगाना भी बहुत अच्छा रहता है।
  • तुलसी के पत्ते पीसकर लगाए
  • गुलाब जल और नीम्बू का रस समान मात्रा में लगाने से दाद से छुटकारा मिल जाता है।
  • अपने मुँह की (सुबह ) लार को हाथ से दाद पर मल लेने से दाद जल्दी ही बिना किसी दवाई के सही हो जाता है। त्वचा के सामान्य रोग और उनके आयुर्वेदिक उपचार

मुँहासे

त्वचा के सामान्य रोग और उनके आयुर्वेदिक उपचार
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यह युवा अवस्था में होने वाली सबसे सामान्य समस्या है जिसका सामना लगभग सभी को करना पड़ता है ये भी शोध युक्त है। 15 वर्षः की आयु से 25 वर्षः की आयु तक युवक-युवतियों के मुँह पर कीलनुमा उभर पैदा हो जाता है। चहरे की रौनक गायब हो जाती है। मुहासे बहुत पेनफुल होते है। इस आयु के रोगी के चेहरे पर पसीना आता रहता है। आपने इस समस्या के समाधान के लिए बहुत सी क्रीम्स उपयोग की होंगी ,जिनका कोई फायदा भी नहीं हुआ होगा ,लेकिन आज आपको सही समाधान मिलेगा वो भी बिना किसी साइड इफेक्ट्स के।

मुहांसे का आयुर्वेदिक उपचार

  • 1 कप दूध (कच्चा )में 4 निम्बू का रस मिलाकर इसे अर्ली मॉर्निंग में एक लैप तैयार कर ले। रात को सोने से पहले मुँह धोकर अच्छे से साफ़ करे और फिर इस लैप को लगाकर सोये। मॉर्निंग में सादा पानी से मुँह धो ले (साबुन का उपयोग न करे )
  • 100gm मसूर की दाल ,250gm मिल्क और 10gm कपूर मिलाकर मिश्रण बना ले और रोज घी के साथ मुँह पे लगाए।
  • 10gm बेसन ,१०गम हल्दी पाउडर ,100gm दही ,तीनो को मिलाकर चेहरे पैर लगाए। सुख जाने पर चेहरा ताज़े पानी से धोये। ये 1 सप्ताह तक जारी रखे ,
  • एक निम्बू का रस,100gm मिल्क,5gm कलोंजी का चूरन मिलाकर सोते समय लैप कर ले। मॉर्निंग में गुनगुने जल से मुँह धो डाले।

एक्जिमा

इस रोग को अपरस या छाजन भी कहते है। इस से ग्रसित शरीर का हिस्सा मोटा और लाल हो जाता है। दाने उभर आते है। पपड़ी जैम जाती है। खूब खुजली होती है। त्वचा के सामान्य रोग और उनके आयुर्वेदिक उपचार
एक्जीमा भी दो प्रकार का होता है ,सूखा और पानी भरे छाले व दानो वाला।
सूखे एक्जीमा में खुजली व जलन होती है।
पानी वाले एक्जीमा में पानी जहा भी लगता है वहा भी एक्जीमा हो जाता है। इस में दर्द भी हो सकता है।

एक्जीमा का आयुर्वेदिक उपचार

  • तरबूज का सूखा छिलका भस्मीकृत (राख ) करके बोतल में भर ले। नारियल के तेल में एक चुटकी भस्म मिलाकर एक्जीमा वाली जगह लगाए।
  • गिलोय का चार चमच रस एक गिलास छाछ (लस्सी०)के साथ पिए।
  • नीम की कोपले छाछ के साथ पीसकर एक्जीमा पर लगाए।
  • पीपल की छाल का काढ़ा बनाकर पिए और इस काढ़े से एक्जीमा वाली जगह को अच्छी तरह से धोये।
  • अपने मूत्र प्रभावित जगह को धोना एक बहुत अच्छा कारगर उपाय है लेकिन मूत्र को ५ मिनट्स में धो ले इसे लगा ही न रहने दे।

खून की खराबी व फोडे -फुंसिया का आयुर्वेदिक उपचार

त्वचा के सामान्य रोग और उनके आयुर्वेदिक उपचार

  • खून की खराबी होने पर लगभग १००गम नीम की कोमल पत्तियों को इतने ही पानी में पीसकर रस निकले। यह रस गाय के आधा किलो घी में पकाये। ऐसे थोड़ा थोड़ा रोज दूध साथ पिए।इसे पिने से खून की खराबी दूर होती है और खून साफ़ होता है।
  • मॉर्निंग में काली मिर्च के २ दाने खाकर एक गिलास पानी पिने से हर प्रकार के स्किन रोग दूर होते है।
  • चिरायता और कोढ़ -कुटटी ५०-६0 गम लेकर मोटा कूटकर रख ले। इसमें से ४गम को ६००गम पानी में रत को भिगोकर रखे। इस दवा को ३ दिन तक पिए। इस प्रकार ४० दिन तक दवा पीए।
  • फोड़े -फुंसियां के उपचार के लिए पान का पत्ता ,घी में चुपड़कर गर्म करे और फोड़े पर बांध ले।
  • नीम की छाल घिसकर फोड़े-फुंसियों पर लगाए।
  • पीपल का पत्ता घी में भिगोकर हल्का गर्म करे और फोड़े पर बांधे। कुछ दिनों में सही हो जायेगा।
  • हल्दी का फाहा ,देशी घी में गर्म करके फोड़े पर ,बांधे लाभ मिलेगा।

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8 Comments

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