सफेद दाग रोग के कारण और उसका होम्योपैथिक इलाज 2019

सफेद दाग रोग के कारण और उसका होम्योपैथिक इलाज 2019:सफ़ेद दाग या vitiligo या ल्यूकोडरमा या फुलेरी एक ही बीमारी के कई नाम है। यह रोग त्वचा द्वारा ‘मिलैनिन ‘ नमक पदार्थ (जो तव्चा का रंग निर्धारित करता है )का बनना बंद हो जाने के कारन होता है। लेकिन तव्चा ग्रंथियों एवं कोशिकाओं में ऐसी कौन सी खराबी आ जाती है की मिलैनिन का बनना रुक जाता है। यह अभी तक अबूझ पहेली ही है।

सफ़ेद दाग क्या होता है?

यह अंडाकार अथवा छितरे हुए धब्बों के रूप में शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। इसमें किसी प्रकार की खुजली अथवा अन्य कोई खास प्रभाव नहीं दिखता।
अब वैज्ञानिक यह मानने लगे है की संभवतया मानसिक दबाव के साथ -साथ थायराइड ग्रंथि से सम्बंधित बिमारियों में शरीर के ऊतकों में किसी वजह से कठोरता एवं सिकुड़ाव आ जाने के कारण ,गंजापन होने के कारण एवं खून की कमी होने पर सफ़ेद दाग के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। (सफेद दाग रोग के कारण और उसका होम्योपैथिक इलाज )

वैसे दुनियां के कई हिस्सों में सफ़ेद दाग के रोगी पाए जाते है लेकिन इंडिया में 8% से अधिक सफ़ेद दाग के रोगी पाए जाते है। औरतों में यह रोग जायदा होता है। सिफिलिस रोग की वजह से भी सफ़ेद दाग बन जाता है।

सफ़ेद दाग कई वर्षों तक एक ही जगह और एक ही आकर में रह सकता है अथवा फ़ैल भी सकता है। अधिकतर ये चेहरे ,हाथ तथा गर्दन पर ही देखने को मिलता है। लेडीज में हर मंथ मासिक स्राव होने पर सफ़ेद दाग का रंग हल्का गुलाबी पड़ जाता है लेकिन मासिक के बढ़ यह पुनः पहले रंग का हो जाता है।

सफेद दाग रोग के कारण और उसका होम्योपैथिक इलाज :-विटामिन्स की कमी होने पर भी सफ़ेद दाग पड़ सकते है। इन वजहों से भी शरीर पर सफ़ेद दाग पड़ सकते है ;

  • गहरा जला होने पर
  • एक्जिमा पर किसी दवाई का लैप लगा लेने से
  • कुछ medicins जो हार्ट एवं पेशाब रोगो में उपयोग होती है के लगातार सेवन से भी दाद पड़ सकते है
  • जन्म से ही शरीर की तवचा के किसी हिस्से में खून का उचित दौर न होने से
  • चोट लगने पर गंभीर बिमारिओं जैसे खून में मवाद पड़ना आदि में सही टाइम पर सही चिकित्सा न मिलने पर भी शरीर पर दाग पड़ सकते है।

लेकिन ये सभी दाग बिलकुल सफ़ेद नहीं होते है। गंभीर बिमारिओं के बाद भूरे रंग के दाग पड़ जाते है।
नोट :-सफ़ेद दाग का धब्बा कुछ उभर लिए होता है।

सफेद दाग का होम्योपैथी में इलाज

सफेद दाग रोग के कारण और उसका होम्योपैथिक इलाज :वैसे तो पीड़ित के हाव- भाव ,आचार -विचार ,पूर्ण इतिहास ,खान -पान आदि को देखते हुए समान लक्षणों के आधार पर कोई दवा दी जा सकती है लेकिन निम्न दवाएं उपयोगी साबित होती है :-

  • एल्युमिना
  • आर्सेनिक अल्बम,
  • सीपिया
  • साइलेशिया
  • सल्फर
  • कैल्केरिया कार्ब
  • कबोएनिमेलिस
  • मर्क्यूरियस
  • एसिडफास
  • माइका
  • हाइड्रोकोटाइल
  • क्यूप्रम एसिटिक
  • कालमेग
  • चेलिडोनियम

संपूर्ण बाते रोगी से जानने के बाद एक पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक जांच के बाद दी जाने वाली दवाई ही जायदा उपयोगी होती है। जिसे होमियोपैथी की भाषा में कॉन्स्टिट्यूशनल रेमेडी कहा जाता है। {सफेद दाग रोग के कारण और उसका होम्योपैथिक इलाज }

  • बीमारी के कारणों के आधार पर दवा देते है जैसे किसी रोगी में ताम्र धातु का अभाव दिखाई दे तो ‘क्यूप्रम एसिटिकम 3X दवा
  • लिवर सम्बन्धी परेशानियों के साथ सफ़ेद दाग होने पर ‘कालमेग ‘चेलिडोनियम दवाओं का साल्ट पेट की गड़बड़ी के साथ सफ़ेद दाग होने पर
  • वेरवोनिया दवा का अर्क एवं क्यूप्रस आक्स नाइग्रम दी जाती है
  • सिफिलिस होने पर सिफिलाइन्स दवा दी जाती है
  • हाइड्रोकोटाइल ,त्वचा मोती एवं पपड़ीदार होने पर
  • अस्सलफ्लेवं 3X,बेचैनी ,रात में ठंड लगना ,जाड़े में अधिकतरबिमारियों का बढ़ जाना ,जल्दी -जल्दी ठंड का असर पड़ना ,खुली हवा में घूमने से परेशानी बढ़ना ,बहुत कमजोरी एवं हर वक्त लेते रहने की इच्छा ,सीधी करवट लेटने पर परेशानी होना ,सुखी तव्चा खुजलाने पर जलन बढ़ जाना ,घुटने में दर्द,छाती में सुइयों की चुभन एवं सांस लेने पर पीड़ा ,
  • सफेद दाग ठीक होने से पूर्व मरीज की अन्य परेशानियों में सुधार होने लगता है। लगभग 6 माह से लेकर तीन वर्ष तक लगातार दवा का सेवन से यह रोग पूरी तरह से सही हो जाता है।
  • रात में परेशानियों का बढ़ जाना ,रात में डर लगना ,याददाश्त कमजोर होना ,बहुत जायदा सफाई पसंद करने लगना ,शरीर में जगह -जगह घाव होने पर ‘सिफीलाईनस -ऍम ‘दवा भी बहुत कारगर होती है।
  • माइका -30 नामक दवा भी सफ़ेद दाग के रोगियों में बहुत कारगर पाई गयी है

नोट :-आयुर्वेदिक चिकित्सा में भी ‘अभरक ‘के नाम से इस दवा के अनेक गुण ‘भाव प्रकाश ‘नामक ग्रंथ में वर्णित है।

चिकित्सावधी में खटटी वस्तुए , खटटे फल ,विटामिन C (असकविरक एसिड ) मैदा आदि पदार्थो का सेवन समिति मात्रा में ही होना चाहिए। कुछ समय के लिए ऐसे खाद्य पदार्थ खाना बंद कर दे तो ज्यादा बेहतर परिणाम प्राप्त होते है। (सफेद दाग रोग के कारण और उसका होम्योपैथिक इलाज )

सफ़ेद दाग होनी के प्रमुख कारण

सफेद दाग रोग के कारण और उसका होम्योपैथिक इलाज
सफेद दाग रोग के कारण और उसका होम्योपैथिक इलाज

सफेद दाग रोग के कारण और उसका होम्योपैथिक इलाज :सफ़ेद दाग कोई छूत की बीमारी नहीं है। लेकिन कुछ मामलों में वंशानुगत हो सकती है जो की ऑटोसोमल डोमिनेंट जींस के द्वारा संप्रेषित होती है। कई लोग इसको कुष्ठ रोग समझकर भर्मित होते है।
कुष्ठ रोग में तव्चा सफ़ेद तो होती है लेकिन साथ में प्रभावित भाग सुन्न होता है। जबकि सफ़ेद दाग में सुन्नपन नहीं होता है। सफ़ेद दाग एक सामान्य रोग है जो शताब्दियों से होता चला आ रहा है।

  • तव्चा रोगों में विभिन्न प्रकार के मलहम या ज्यादा मात्रा में एंटीबॉयटिक्स के दुरूपयोग से भी कुछ व्यक्तियों में सफ़ेद दाग देखने को मिल रहे है।
  • परिवार में TB ,मधुमेह का इतिहास ,थाइरोइड ,पिट्यूटरी व ऐड्रिनल ग्रंथियों के अस्वस्थ होने पर भी यह रोग उत्पन्न हो सकता है।
  • रक्ताल्पता भी एक कारण होती है।
  • जायदा चिंता। दुखी ,मानसिक परेशानियों आदि से शरीर के हार्मोन्स व एंजाइम्स की प्रकिरिया में गड़बड़ होने से भी त्वचा पर सफ़ेद दाग उभर सकते है।
  • लेडीज में टाइट पेटीकोट बांधने से ,बिंदी जिनमे चिपकाने के लिए गम लगा होने से लगातार प्रतिकीरिया कर सफ़ेद दाग उतपन्न कर देता है।
  • इम्यून सिस्टम में गड़बड़ पैदा होने पे भी शरीर में कुछ ऐसी कोशिकाएं बन जाती है ,जो रंग देने वाले पिग्मेंट (मैलेनिन )को नष्ट कर देती है ,जिसके कारण त्वचा पर सफ़ेद दाग हो जाते है।
  • इस रोग में त्वचा का रंग सफ़ेद होने के अलावा कोई भी सरंचनात्मक परिवर्तन नहीं आता है और न ही अन्य परेशानी होती है। ये सफ़ेद दाग शरीर में कही भी मिल सकते है।
  • उपरोक्त सफेद रोग के कारण और इसकी होम्योपैथिक दवाएं उपयोग करने से अपने डॉक्टर से जरूर मिले और उनकी बताई मेडिसीन ही काम में न ले।

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