Gharelu Nuskhe for Psoriasis in Hindi

Gharelu Nuskhe for Psoriasis in Hindi:-सोराइसिस एक जिद्दी एवं समय -साध्य रोग है। यानि की सोराइसिस का ट्रीटमेंट तो रोगी के धैर्य की परीक्षा है। रोगी जितना धैर्यवान ,साधन -सम्प्पन तथा परहेजी होगा ,उतना ही उसके स्वस्थ होने की सम्भावना अधिक होती है।
सोराइसिस का नाम सुनते ही बहुत सारे सवाल हमारे दिमाग में आने लगते है। यह रोग क्या है,यह क्यों होता है ,क्या यह एक वंशानुगत रोग है ?क्या यह रोग अपने आप समाप्त हो जाता है ?किस प्रकार का उपचार उपयोगी रहता है ?
यह रोग क्यों होता है और कैसे होता है ,इसका अभी तक कोई ठोस प्रमाण नहीं है। फिर भी कुछ ऐसे कारन है जो इस रोग को जन्म देने में हेल्प कर सकते है। ठण्ड के मौसम या ठंडी जलवायु में यह रोग होने की जायदा सम्भावना रहती है। कुल रोगियों में 90 % यूरोपीय देशों के है जंहा महीनो तक सूर्य के दर्शन नहीं होते है तथा शेष 10 % रोगी भारतीय उपमहाद्वीप के है।

सोरायसिस के लक्षण (Gharelu Nuskhe for Psoriasis in Hindi)

  • सोराइसिस एक लम्बे टाइम तक चलने वाला स्किन रोग है ,लेकिन यह वंशानुगत नहीं है। हो सकता है यह रोग पूर्व में परिवार के किसी मेंबर को हुआ हो ,लेकिन यह कहना की यह रोग वंश से चलता है। अनुचित होगा।
  • यह रोग कीटाणुओं से नहीं होता है। ऐसा कोई संकेत अभी तक नहीं मिले है। यह रोग किसी एक खास कारण से नहीं होता है तथा रोगी अपना जीवन सामान्य तौर से अपने फॅमिली के साथ रह सकता है।
  • साइरोसिस रोग में रोगी के शरीर पर छोटी -बड़ी ,गोलाकार सफ़ेद रंग की पपडियां उभर आती है। मछली के ‘स्केल्स ‘की तरह पपडियां आसानी से स्किन से उतरने लगती है तथा स्किन के उस जगह पर ब्लड चमकने लगता है।
  • जाड़ो में मानसिक तनाव के टाइम पपडियां उभरने और गिरने की स्पीड बढ़ जाती है।
  • खुजली भी रहती है ,जिसके कारण इस रोग से बाकि शरीर भी प्रभावित होता है।
  • खुजली होने से सफ़ेद दूधिया रंग की पपडियां आसानी से उतर जाती है अतः कुछ ही घंटो बाद फिर से उभर आती है। ये स्किन की ‘क्रिटिनाइजेशन क्रिया ‘कहलाती है जो बहुत तेजी से होने लगती है।
  • नोर्मल्ली इस क्रिया को पूरा होने में 28 दिन लगते है ,लेकिन इस रोग की वजह से ये 3 -4 दिन में ही पूरी हो जाती है।
  • प्रारम्भ में सोराइसिस सिर पर ,कोहनी ,घुटनो,पीठ ,पेट के निचले हिस्सों में होता है लेकिन नाखुनो ,हथेलियों तथा तलवों का भी इस रोग में प्रभावित होना नार्मल ही है।

सोराइसिस के प्रकार (Gharelu Nuskhe for psoriasis in Hindi)

फ़ैलकसर सोराइसिस
इस तरह की सोराइसिस में बगले ,जाँघे ,गला व लेडीज के स्तनों निचले हिस्से अधिक प्रभावित होते है। तलवों व हथेलियों पर भी यह रोग उभर आता है। इन स्थानों पर स्किन मोटी व भद्दी नज़र आने लगती है।

पैसबुलर सोराइसिस
स्किन के इस सोराइसिस वाले स्थान पर छोटे -बड़े मवाद भरे दाने उभर आते है। खुजली बढ़ जाती है और रोग तेजी से शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने लगता है। {Gharelu Nuskhe for Psoriasis in Hindi}
आर्थोपैथी सोराइसिस
जब यह रोग रीढ़ की हड्डियों के जोड़ो व घुटनो को प्रभावित करता है तो उस अवस्था को आर्थोपैथी सोराइसिस कहते है।

  • जब यह रोग शरीर के हिस्सों में फ़ैल जाता है और शरीर पर सफ़ेद पपडिया चमकने लगती है तो इस अवस्था को ‘एक्सफोलियेटिव ड्रमैटाइटिस ‘कहते है। इस समय रोगी को शारीरिक व मानसिक कष्ट महसूस होता है।
  • सोराइसिस से प्रभावित होने के बावजूद सिर के बाल नहीं गिरते है।
  • सोराइसिस विभिन्न कारणों से पुनः लौटकर आ सकता है। यह देखा गया है की रोगी भला चंगा हो जाता है लेकिन कुछ वर्षो बढ़ अचानक रोग फिर से उभर आता है। Gharelu Nuskhe for Psoriasis in Hindi
  • जो लोग जानवरों की चमड़ी का व्यापार करते है ,उनमे यह रोग होने की सम्भावना अधिक होती है।
  • इस रोग से जच्चा -बच्चा की हेल्थ पर कोई असर नहीं पड़ता है और दोनों ही सवस्थ रहते है। ऐसी तरह वैवाहिक जीवन पर भी कोई असर नहीं पड़ता है ,लेकिन स्किन के रूखेपन व पपड़ियों के जमने से आपके साथी के मन में कुछ गलत भावना जन्म ले लेती है।
  • अतः सुखी संपन्न दाम्पत्य जीवन के लिए यह जरुरी है की इस रोग की गंभीरता को छिपाया न जाए तथा टाइम रहते अपने जीवन साथी को इस रोग से अवगत कराए।
  • गठिया तथा एक्जीमा के साथ जुड़े होने पर सोराइसिस विकृत रूप में अधिक जटिल हो जाता है।
  • मॉर्निंग की धुप इस रोग की सब से अच्छी नेचुरल दवा है। सोराइसिस से ग्रस्त शरीर के हिस्सों को कम से कम आधे घंटे धुप का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • यदि आप ऐसी जगह रहते है जहा पर सर्दी बहुत पड़ती है और धुप कम हो तो ,आपको कुछ दिनों के लिए ऐसी जगह चले जाना चाहिए ,जहा धुप अधिक व सर्दी कम हो।

सोराइसिस रोगियों के लिए निम्न बातों को ध्यान में रखना जरुरी है :

  • धुप का सेवन नियमित करे तथा कभी -कभी कुदरती सल्फर झरनो में स्नान करने से भी रोग के नियंत्रण में सहायता मिलती है।
  • हरी सब्जियों ,फल तथा कैल्शियम एवं विटामिन बी और विटामिन इ युक्त भोजन अधिक मात्रा में ले। घी ,मांस ,अंडा तथा तली हुई वस्तुओ का सेवन कम करें।
  • सिंथेटिक कपड़ों को न पहने ,केवल कॉटन के कपडे ही प्रयोग करे। अपने शरीर को स्वस्छ रखे तथा केवल गिल्सरीन युक्त साबुन का ही प्रयोग करे।
  • शरीर तथा मस्तिष्क पर अनावश्यक दबाव न डाले तथा उत्तेजक अवस्थाओं से बचे।
  • गर्भावस्था की जानकारी तुरंत अपने डॉक्टर को दें। हो सकता है की आपके इलाज में कुछ चेंज करना पड़े।
  • दूसरे रोगियों को दवाईया बिना डॉक्टर की सलाह पर अपने रोग के लिए प्रयोग न करे और न ही दूसरों को अपनी दवाइया दे।
  • यदि आप कार्टिसोन युक्त और ‘स्टीरॉइड्स ‘गोलियों का सेवन क्र रही है तो बिना डॉक्टर की सलाह के एकदम न करे। नुक्सान हो सकता है। {सोरायसिस के लक्षण -प्रकार -आयुर्वेदिक इलाज}

सोराइसिस का आयुर्वेदिक उपचार

Gharelu Nuskhe for psoriasis in Hindi
Gharelu Nuskhe for psoriasis in Hindi

सोरायसिस के लक्षण -प्रकार -आयुर्वेदिक इलाज:-सोराइसिस बहुत जिद्दी सवभाव का रोग है। छोटी -मोटी दवा तो इस पर कोई प्रभाव ही नहीं करती है। देर तक चिकित्सा करने पर ही यह रोग पीछा छोड़ता है तथा जो दवा एक बार प्रभाव करती है ,दूसरी बार उसी चिकित्सा को फ़ैल होते हुए भी देखा गया है। इतना सब होने पर भी आयुर्वेदिक चिकित्सा इस रोग को जल्दी और स्थाई रूप से सही कर सकती है। आयुर्वेदिक चिकित्सा सरल ,कम खर्च वाली और बिना कोई साइड इफेक्ट्स के होती है।

  • चिकित्सा प्रारंभ करने से पूर्व रोगी को घी खाना चाहिए ,फिर रात्रि में अरंड तेल अथवा पंचसकार चूर्ण से विरेचन करवाना आवश्यक है।
  • नाजुक मिजाज रोगी यह काम बादाम रोगन से संपन्न कर सकते है।
  • दूसरे दिन रस -माणिक्य दो -दो रती मॉर्निंग -इवनिंग में मिलाकर चाटें ,साथ ही सदा पानी अथवा दूध रूचि के अनुसार पि सकते है।
  • खदिरारिष्ट एक औंस बराबर पानी मिलाकर भोजन से 15 मिनट पूर्व चाय की तरह घूँट -घूँट पीना चाहिए। खदिरारिष्ट खट्टा न हो और कम – से -कम 3 -4 वर्ष पुराना होना चाहिए। दोनों औषधियां भोजन से पूर्व ही लेनी चाहिए।
  • कष्ट वाले स्थान को साबुन से धोकर छिलके उतारकर महामृचादि तेल से चुपड़ के थोड़े समय तक धुप में रहना बहुत हितकर रहता है। इस औषधि के साथ यदि सर्पगंधा मूल का चूर्ण दो -दो रति दिन में एक बार पानी से खा लिया जाए तो त्वरित लाभ मिलता है। (Gharelu Nuskhe for psoriasis in Hindi)

Note :-यदि ब्लड प्रेशर नार्मल से कम है तो सर्पगंधा चूर्ण का प्रयोग न करे

  • सोहांजने के पत्तों की सब्जी अथवा उनको रोटी में मेथी की तरह मिलकर खाने से भी तुरंत लाभ होता है।
  • यदि सप्ताह भर की चिकित्सा से विशेष लाभ प्रतीत न हो तो महामृचादि तेल के स्थान पर वातदत्वक तेल को लगाना चाहिए
  • वातदत्वक तेल के साथ धुप -सेवन की आवश्कता नहीं रहती।
    उभार घट जाने पर वातादवक तेल का प्रयोग बंद करके पुनः महामरीचादि तेल का प्रयोग प्रारम्भ कर देना चाहिए और साथ ही धुप मर बैठना भी चालू कर देना चाहिए। धुप में जायदा टाइम तक न रहे।भार के घटते -घटते स्किन समतल हो जाती है ,लेकिन उभारों के स्थान पर काले -काले निशान बचे रहते है।
  • कई औषधि -प्रयोग से शुरू -शुरू में लाभ होता है लेकिन कुछ टाइम बाद लाभ की गति बहुत मंद हो जाती है। इस स्थति में रस माणिक्य के स्थान पर ‘तालकेश्वर ‘रस आधी -आधी रति मॉर्निंग -इवनिंग दोनों टाइम खानी चाहिए।
  • शेष चिकित्सा पहले जैसे ही जारी रहनी चाहिए।
  • जब रोगी को समझे की पर्याप्त लाभ हो गया है ,तब पंचतिक्त घृत गूगल 6 -6 माशा मॉर्निंग -इवनिंग गर्म चाय अथवा दूध के साथ मिलाकर सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से आथ्र्राइटिस में भी लाभ मिलता है।

नोट :-गंघक के प्रयोग से सोराइसिस में कोई लाभ नहीं मिलता है। (Gharelu Nuskhe for psoriasis in Hindi)

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